एक बालश्रमिक अपना पेट भरने के लिए अपने नाज़ुक हाथों से खतरनाक काम करता है कभी कभी वह ग़लत संगत में पड़ जाता हो ओर वह एक कुख्यात अपराधी बन जाता है।सामाजिक दर्पण में एक डरवाना प्रतिबिंब बन जाता है ।वह सुबह से शाम तक एक पटाखा उधोग ,चुड़ी उधोग ,आटो शाप ओर कई खतरनाक उधोग में कार्य करता । सशक्त शिक्षा पाना उसके लिए एक दिवा स्वप्न बन जाता है।वह परिवार और अपने मालिक के बीच एक कठपुतली बन जाता है ।जहां उसके एक तरफ कुंआ होता है और दुसरी तरफ खाई । भाग्य की यह विडबंना है कि एक बाद श्रमिक कोई अपराध नहीं करता मगर फिर भी उसको अपने बचपन में कठोर सजा भुगतनी पड़ती है।उसे अपने इच्छाओ और महत्वाकांक्षाओ का दमन करना पड़ता है ।
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