PRESENTATION AND CREATION BY ADV.PANKAJ JOSHI UNDER BANNER OF APEKSHA ONLINE ENGLISH CLASSES 9950511377
JUDGES—-M.H.BEG CJ P.N.BHAGWATI Y.V.CHANDRACHUD V.R KRISHNA AYER N.L.UNTWALIA S.MURTAZA ALI
1.DATE OF JUDGEMANT 25 JANUARY 1978
2.relevent provisions—-article 21 of constitution of India
FACTS OF CASE —-
1. याचिका कर्ता को पासपोर्ट एक्ट 1967 के अन्तर्गत एक पासपोर्ट जारी किया गया ।
2 याचिकाकर्ता को एक पत्र भेजा गया जिसमें पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3) (c) के अन्तर्गत उनको पासपोर्ट जमा करवाने के लिए कहा गया ।यह पत्र 2.7.1977 को पासपोर्ट आफिस के द्वारा भेजा गया था।
3.याचिका कर्ता ने इस मामले में कारण जानने के लिए याचिका कर्ता ने पासपोर्ट आफिस को एक पत्र लिखा ।पासपोर्ट आफिस इस मामले का कारण बताने में पुरी तरह असफल रहा ।
4.याचिका कर्ता ने अनु 32 के अन्तर्गत एक याचिका इस आदेशके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगाई ।
legal issues framed in this matter—–
1.यात्रा करने का अधिकार अनु 21 के अन्तर्गत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अन्तर्गत आता है या नहीं
2. पासपोर्ट एक्ट 1967 की धारा 10(3) (c) अनु 14,19,21 का उल्लघंन करती या नहीं
3. पासपोर्ट आफिस का यह आदेश प्राक्रतिक न्याय के सिद्धान्तों का विरोध करता है या नही
4.कोई भी न्यायिक प्रक्रिया जो अनु 21 का विरोधकरती है वह मनमानी है या नहीं
DECISION BY SUPREME COURT IN THIS MATTER
1.विदेश जाने का अधिकार अनु 21 के द्वारा पुरी तरह संरक्षित है। इस निर्णय में अनु 21 का विस्तार किया गया और व्यक्तिगत स्वतन्त्रता को एक विस्तारीत आयाम दिया गया ।
2.पास पोर्ट एक्ट की धारा 10(3)(c) किसी प्रकार मुलभुत अधिकारों का उत्लघंन नहीं करती है।यह असंवैधानिक नहीं है मगर जब देश की सुरक्षा को खतरा हो तभी ऐसा किया जा सकता जो इस मामले में नहीं था।
3.जो आदेश पासपोर्ट आफिस के द्वारा जारी किया गया था उसे सुप्रीम कोर्ट के द्वारा खारीज कर दिया गया ।
4.इस केस में न्याय के सिद्धान्तों AUDI ALTEREM PARTEM के सिद्धान्त का पालन नहीं किया गया अर्थात् दुसरे पक्ष को पुरी तरह नहीं सुना गया ।
5.अनु 14,19,21 भारतीय संविधान के गोल्डन त्रिकोण golden triangle कहलाते जो पासपोर्ट आफिस के बिना किसी वैध कारणों के ऐसा करना इन अनु के खिलाफ था ।
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