इस प्रकार 24 अगस्त 2017 को 9 न्यायधीशो की खंडपीठ ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकारों में शामिल किया है।इस सन्दर्भ में डेटा संरक्षण अधिनियम 2019 पेश किया गया था जो श्री कृष्ण समिती की सिफारीशो पर आधारीत था । इस विधेयक के अनुसार किसी व्यक्ति के डेटा के संग्रह ,संचालन और प्रक्रिया को संरक्षित किया जायेगा।
इसी क्रम में सुचना प्रोधौगिकी अधिनियम 2000 के अन्तर्गत यदि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा के साथ छेडछाड की जायेगी तो उस अपराध को साइबर क्राईम के अन्तर्गत एक संगिनी अपराध माना जायेगा।
भारतीय प्रति स्र्पधा आयोग की जांच के खिलाफ व्हाट्स एप और मेटा ने अपील की थी मगर इस अपील को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया था। यदि निजता के अधिकार का उल्लघंन होगा तो ही आई आई जांच करेगी ।क्यों की यह जांच करने के लिए एक स्वतंत्र प्राधिरण है ।
इस प्रकार उच्चतम न्यायलय ने निजता के अधिकार का एक सुनहरी पन्ने पर विवेचन किया है और निजता के अधिकार की आड़ में एक इंसान के मान मर्यादा की रक्षा की है।ओर भारतीय नागरीको को गरीमा पुर्ण जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है।
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