ESSAY NO.1 PART 3 RIGHT TO PRIVACY

ESSAY TOPIC—-RIGHT TO PRIVACY

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निजता के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने कई केसों में एक नया आयाम प्रदान किया है । ए पी शर्मा बनाम सतीश चन्द्र के मामले में यह फैसला दिया गया कि निजता के अधिकार को मुल अधिकारों में शामिल नहीं किया जा सकता है इस मामले में तलाशी और जब्ती का मामला शामिल था ।इसी प्रकार खड़क सिंह के मामले में निजता के अधिकार को एक मौलिक अधिकार नहीं माना ।

राजगोपाल बनाम स्टेट आफ तमिलनाडु यह पहला मामला था जहां निजता के अधिकार की परिधी को विस्तारीत किया गया और इस के अर्थ को व्यापकता प्रदान की गयी थी ।

मगर स्पष्ट और पारदर्शी व्याख्या किसी भी केस में नहीं की गयी थी ।2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के एस पुतुस्वामी बनाम युनियन आप इंडिया में की गयी थी।किसी व्यक्ति के डेटा की सुरक्षा और निजता के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए ।क्यों कि अनु 21 में जीने के अधिकार ,निजता का अधिकार और स्वतंत्रता का अधिकार शामिल‌है ।इनका आपस में अटुट बंधन है।निजता के अधिकार को गैर सरकारी तत्वों द्वारा हनन किया जा सकता है।

इस केस में निजता के अधिकार को पुर्ण रुप से मान्यता दी गयी मगर यह अधिकार ना तो निरकुंश‌ है ना ही मनमाना है।इस अधिकार पर तार्किक और युक्ति युक्त प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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