Hello, I’m Veronica

The sky is not completely dark at night. Were the sky absolutely dark, one would not be able to see the silhouette of an object against the sky.

  • APEKSHA ONLINE ENGLISH CLASSES 9950511377

    PHRASES

    1.DRINK LIKE A FISH —DRINK EXCESSIVE BOOZE

    2.SOME THING IS FISHY FISHY —SOMETHING IS SUSPECTED

    3.FISH OUT OF WATER—UNCOMFORTABLE CONDITION

    4.FISH OUT OF TROUBLED WATER—TAKE BENEFIT FROM SOMEBODY ‘S LOSS

    5.FISH OUT—TAKE OUT SOMETHING FROM WATER


  • ESSAY 1 PART 5 RIGHT TO PRIVACY

    इस प्रकार 24 अगस्त 2017 को 9 न्यायधीशो की खंडपीठ ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकारों में शामिल किया है।इस सन्दर्भ में डेटा संरक्षण अधिनियम 2019 पेश किया गया था जो श्री कृष्ण समिती की सिफारीशो पर आधारीत था । इस विधेयक के अनुसार किसी व्यक्ति के डेटा के संग्रह ,संचालन और प्रक्रिया को संरक्षित किया जायेगा।

    इसी क्रम में सुचना प्रोधौगिकी अधिनियम 2000 के अन्तर्गत यदि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा के साथ छेडछाड की जायेगी तो उस अपराध को साइबर‌ क्राईम के अन्तर्गत एक संगिनी अपराध‌ माना जायेगा।

    भारतीय प्रति स्र्पधा आयोग की जांच के खिलाफ व्हाट्स एप और मेटा ने अपील‌ की थी मगर इस अपील को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया था। यदि निजता के अधिकार का उल्लघंन होगा तो ही आई आई जांच करेगी ।क्यों की यह जांच करने‌ के लिए एक स्वतंत्र प्राधिरण है ।

    इस प्रकार उच्चतम न्यायलय ने निजता के अधिकार का एक सुनहरी पन्ने पर विवेचन किया है और‌ निजता के अधिकार की आड़ में एक इंसान के मान मर्यादा की रक्षा की है।ओर भारतीय नागरीको को गरीमा पुर्ण जीवन जीने का अवसर‌ प्रदान किया है।


  • ESSAY NO.1 RIGHT TO PRIVACY PART 4.

    निजता के अधिकार को तय करने के लिए कुछ मानक स्थापित किए जाने चाहिए और एक सुनिश्चित दायरा रेखांकित किया जाना चाहिए ।न्याय पालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव पैदा नहीं होना चाहिए ।इस पेशोपेश को न्याय पालिका दुर कर सकता है क्यों की वह एक लाईट हाऊस की तरह काम करता है ।

    उच्चतम न्यायलय ने अपने निर्णय के द्वारा देश‌ की गरीमा और जीवंतता का गौरव बढ़ाया है।लोकतंत्र की गरीमा‌ का मान बढ़ाया है ।निजत के अधिकार पर जो खतरे की तलवार लटकती थी उसे हमेशा के लिए नष्ट कर दिया गया है।निजता के अधिकार का उल्लघंन एक उचित और तर्क संगत कानुन करेगा ।

    इस अधिकार का विस्तार भारतीय लोकतंत्र का एक अमिट और यादगार पडाव है।यह निर्णय भारतीय इतिहास का एक सुनहरी पन्ना है यह आयाम लोकतंत्र को मजबुत बनायेगा ।यह सिद्धान्त मानवता ,समानता और आधुनिकता की विचारधारा का समावेश करता है ।यह महत्व पुर्ण अधिकार अन्य शक्ति शाली अधिकारों की आधारशिला है।इस प्रकार कोई इंसान अपना जीवन प्रतिष्ठा और गौरव‌ के साथ जियेगा ।


  • ESSAY NO.1 PART 3 RIGHT TO PRIVACY

    ESSAY TOPIC—-RIGHT TO PRIVACY

    CREATION AND PRESENTSTION BY ADV.PANKAJ JOSHI UNDER SHADOW OF APEKSHA ONLINE ENGLISH CLASSES

    निजता के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने कई केसों में एक नया आयाम प्रदान किया है । ए पी शर्मा बनाम सतीश चन्द्र के मामले में यह फैसला दिया गया कि निजता के अधिकार को मुल अधिकारों में शामिल नहीं किया जा सकता है इस मामले में तलाशी और जब्ती का मामला शामिल था ।इसी प्रकार खड़क सिंह के मामले में निजता के अधिकार को एक मौलिक अधिकार नहीं माना ।

    राजगोपाल बनाम स्टेट आफ तमिलनाडु यह पहला मामला था जहां निजता के अधिकार की परिधी को विस्तारीत किया गया और इस के अर्थ को व्यापकता प्रदान की गयी थी ।

    मगर स्पष्ट और पारदर्शी व्याख्या किसी भी केस में नहीं की गयी थी ।2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के एस पुतुस्वामी बनाम युनियन आप इंडिया में की गयी थी।किसी व्यक्ति के डेटा की सुरक्षा और निजता के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए ।क्यों कि अनु 21 में जीने के अधिकार ,निजता का अधिकार और स्वतंत्रता का अधिकार शामिल‌है ।इनका आपस में अटुट बंधन है।निजता के अधिकार को गैर सरकारी तत्वों द्वारा हनन किया जा सकता है।

    इस केस में निजता के अधिकार को पुर्ण रुप से मान्यता दी गयी मगर यह अधिकार ना तो निरकुंश‌ है ना ही मनमाना है।इस अधिकार पर तार्किक और युक्ति युक्त प्रतिबंध लगाया जा सकता है।


  • ESSAY NO 1 PART 2

    ESSAY TOPIC RIGHT TO PRIVACY

    CREATION AND PRESENTATION BY ADV.PANKAJ JOSHI

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    भारतीय संस्कृति और निजता के अधिकार में एक अटुट बंधन है ।प्राचीन भारत में निजता के अधिकार का उल्लघंन दंड की परिधी में आता था।निजता का अधिकार एक विचारणीय और एक अति महत्व पुर्ण प्रशन है जो विकासशील समाज के लिए एक अपरिहार्य अंग है।यह अधिकार एक अभेद कवच के समान है जो समाज की अनुचित हस्तक्षेप से रक्षा करता है ।अत यह एक रक्षक की तरह काम करता है।

    इस प्रकार निजता के अधिकार को अनु,21 के अन्तर्गत प्राण व दैहिक स्वतन्त्रता के अधिकार के आंतरीक भाग के रुप में ओर संविधान के भाग 3 द्वारा गांरटीक्रत हिस्से के रूप में संरक्षित किया गया है।किसी व्यक्ति के निजी जीवन में हस्तक्षेप करना ना तो प्रशंसनीय ना ही सराहनीय है।

    तकनीकी विकास ने इस ज्वलंत समस्या के लिए आग में घी का काम किया है।आंतकवाद विरोधी अभियानों के लिए गोपनीयता एक चर्चा का विषय है और ऐसे अभियानो के लिए गोपनीयता का अधिकार रास्ते की सबसे बड़ी बाधा है । साईबर अपराधी अपना उत्लु सीधा करने के लिए लोगो की निजी जानकारी चुरा लेते हैं जो गैर कानुनी गतिविधी उनके जीवन और जीवन की खुशियों का विनाश कर देती है।


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